ओमप्रकाश बारहवीं पास है . पटना में रहते है और पत्राचार से बीए कर रहे है. ओमप्रकाश और इन जैसे सैकड़ों युवा जो भारतीय सेना में भर्ती होकर एक अच्छे भविष्य के साथ देश सेवा का भी जज्बा रखते है. लेकिन कई कोशिशों के बाद भी उनका यह दुर्भाग्य रहा कि वे सलेक्ट नहीं हो पाए. ओमप्रकाश के पिता ऑटो चलते है, जिससे पुरे परिवार का खर्चा चलता है. परिवार में दो बहनों के होने और उनकी शादी कि चिंता से मनो पुरे परिवार कि भविष्य कि योजनओं पर ग्रहण लगा दिया हों,
संचार क्रांति और टेलिकॉम सेक्टर के चलन ने एक एसे समय में जब ओमप्रकाश के लिए सबसे पहला काम अपनी पारिवारिक आमदनी बढ़ाना था डूबता को तिनके का सहारा दिया. कुछ हजार रुपयों से एक नामी टेलिकॉम कम्पनी को सेवा देने वाले कॉल सेंटर को ज्वाइन करने वाले ओमप्रकाश आज बारह हजार रूपये महिना कमाते हैं. अपनी एक बहन की शादी करने के बाद तो मानो उनका पुराना आत्मविश्वास फिर से लौट आया हैं.
आज पटना में कई बड़ी कम्पनिओं के कॉल सेंटर खुल गए हैं. टेलिकॉम सेक्टर की कम्पनी जैसे - एयरटेल, वोडाफोन, डोकोमो, युनिनोर की तरह ही तेलिब्रांड जैसी बड़ी रिटेल चैन के कॉल सेंटर भी आज पटना में काम कर रहे हैं. निजी ही नहीं बिहार सरकार ने भी अपने कई विभागों और योजनओं में जैसे- मानव विकास विभाग और महादलित मिशन में आम लोगो को हेल्प लाइन सेवा मुहैया करने के लिए कॉल सेंटर खोंले हैं. जिसे बिहार के युवा एक अच्छे विकल्प के तौर पर आपना सकते हैं. कालेजों में पढ़ने वाला युवा वर्ग आज पढाई के साथ ही कॉल सेंटर में काम कर आपनी पढ़ाई का खर्चा खुद ही उठाने के साथ-साथ अपने परिवार को भी मदद दे रहे हैं. एसे युवाओं के लिए कॉल सेंटर कमाई के जरिये के साथ ही आधुनिक जीवन की पहचान बन गए हैं. निश्चित योग्यता के के साथ एक सामान्य से इंटरव्यू से कॉल सेंटर में नौकरी पाई जा सकती है. जिसमे १५ से १८ दिनों की ट्रेनिंग के बाद काम चालू हो जाता है. फोन पर अपने ग्राहकों की समस्या सुलझाना हो या किसी उत्पाद की बिक्री करना हो इन सभी कामो के लिए आज कॉल सेंटर भी युवओं की ओर देख रहे हैं.
मेट्रो सिटी में चलने वाले कॉल सेंटर पटना के कॉल सेंटर की अपेक्षा अधिक सुविधा संपन्न होते हैं. वहाँ अधिक वेतन के साथ आने - जाने के लिए गाड़िया रात में महिलाओं के के लिए सुरक्षा व्यवस्था ओर समय-समय पर प्रोत्साहन की व्यवस्था होती है. लेकिन तेजी से विकास करते बिहार में कॉल सेंटर का चलन आभी नया ही है. ओर इसके कई सालो में कई हज़ार करोड़ के हो जाने की सम्भावना हैं. फिक्की जैसे बड़े संगठन ने भारत में बीपीओ ओर कॉल सेंटर सेक्टर की वार्षिक विकास दर ५० प्रतिशत से भी आधिक बताई हैं. जो युवओं के साथ ही स्थानीय सरकार के लिए राजस्व का अच्छा स्त्रोत है.
बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी ने कॉल सेंटर के बड़ते प्रभाव ओर उसके फायदों को देखते हुए ही एक नामी कंपनी के कॉल सेंटर के उद्घाटन समाहरो में बिहारी युवओं को सलहा दी थी कि वेह आगे आकर बीपीओ ओर कॉल सेंटर से जुड़े जिनमें बीए और बी. कॉम जैसी परंपरागत डिग्रियों कि जरुरत नहीं होती हैं. इसी के चलते आज पटना के आधिकांश युवा इसकी और आकर्षित हो रहे हैं और ओमप्रकाश कि तरह ही अपने सपनो को साकार करने में लगे हुए हैं.
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