Monday, January 17, 2011

आंध्रा का नृत्य हरियाणा की जमी और भारतीय युवा दिल

आज जाने की जिद ना करो.......छोड़ दो आंचल जामाना क्या कहेंगा- ना जाने इतने ही कितने तरह के गीतों के बीच भारतीय जनसंचार संस्थान के 125 से भी अधिक भावी पत्रकार छात्रों का सफर चल रहा था- अपनी मंजिल सूरजकुंड मेले की ओर। दिल्ली के सीमावर्ती और हरियाणा के प्रसिद्ध जिले फरिदाबाद में स्थित सूरज कुंड जहां आज का थीम था आंध्रप्रदेश जिसमें आंध्रा संस्कृति की झलक देखते बनती थी। वैसे तो हमारा देश भारत पूरे विश्व में अपनी संस्कृतिक विविधता के जिए जाना जाता है लेकिन ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है कि देश की राजधानी दिल्ली से आए एक अलग सांस्कृतिे परिवेश के लोग देश की सबसे सम्रद्ध संस्कृतियों में से एक हरियाण/जाट संस्कृति की जमीन पर प्राचीनतम संस्कृति आंध्रा/तेलगु के विविध संस्कृतिक रंगों को निहारते हुए अपना बहुमूल्य समय व्यतीत कर रहे हो।
      भारतीय जन संचार संस्थान जो खुद भी कम विविधता से भरा हुआ नहीं है। देश के लगभग हर राज्यों से आने वाले छात्रों ने मिलकर इसे लगभग एक लघु भारत बना दिया है। कोई राजस्थान से तो कोई बंगाल से। कोई बिहार से तो कोई झारखण्ड़ से। कोई अपना मध्य प्रदेश छोड़कर आया है तो किसी को वापस अपने उत्तराखण्ड जाकर कुछ कर दिखाना है। ऐसे ही अनेक रंगो के फूलों से बसता है देश का सबसे बड़ा और सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता प्रशिक्षण का संस्थान। 

कल सुबह 9 बजे आप सभी संस्थान से सूरज कुंड मेले के लिए रवाना होंगे। इस बात का ध्यान रखे की आप आईआईएमसी का प्रतिनिधित्व करते है इसलिए संस्थान की गरिमा और मर्यादा का पूरा ख्याल रखे पूरा आनंद उठाए और कुछ नया सीखे जो आपको अपने व्यक्तिगत् और व्यवासायिक जीवन में काम आ सके। कुछ इस तरह9 बजे संस्थान परिसर में एक नए अनुभव को पाने के लिए व्याकुल और सूरज कुंड जाने के लिए ललायित नजर आ रहा था। लगभग 9%30 मिनट पर संस्थान प्रबंधन की और से उपलब्ध कराई गई] तीन बसो में सवार होकर भावी पत्रकारों का जत्था निकल पड़ा अपने निर्धारित गंतव्य की ओर। गाते सोते लड़ते-झगड़ते प्यार से गले मिलते इन छात्रों में भले ही अनेकों असमानताएं हो लेकिन इनका अपनापन और एक ही मातृभुमी की संताने होने का जज्बा अपने आप में किसी मिशाल से कम नजर नहीं आता।
 के अनौपचारिक निर्देशों और सलाहों के साथ संस्थान का प्रत्येक छात्र निर्धारित समय पर सुबह
      दो घंटे के अपने इस शानदार सफर के बाद सूरजकुंड मेले पहुचकर  इनका उत्साह चार गुना बड़ गया हो अपने अपने मित्रों की टोलियों में निकल पड़े मेले को अपने अपने चश्मे से देखने। कोई सांस्कतिक कार्यक्रमों के मंच का आनंद उठा रहा था तो कोई हेंड़ी क्राफ्ट आइटम को देखने में लगा हुआ था किसी को पेट पूजा करनी थी तो कोई सबसे पहले पूरा मेला घूम लेना चाहता था। कुछ तो हाथो में कापी-कलम लिए अपने पत्रकारिय गुणों का उपयोग कर देशी विदेशी महमानों का साक्षत्कार करने में व्यस्त था तो कुछ मेले के प्रबंधन की जानकरियां जुटाने में लगे हुए थे।